विश्व का आठवा महाद्वीप कौन सा है? यह कहाँ अवस्थित है?

अभी तक हमने दुनिया के सात महाद्वीपों के बारे में जानते हैं, जिसमें एशिया अफ्रीका उत्तरी अमेरिका दक्षिण अमेरिका अंटार्कटिका ऑस्ट्रेलिया शामिल है. भू वैज्ञानिकों के अनुसार शुरुआत में पृथ्वी एक आग के गोले का समान था, और इस पृथ्वी के पूरे भूभाग पर एक ही सरफेस एरिया था जिसका नाम पैंजिया था, और यही पंजिया बाद में 7 टुकड़ों में टूट कर सात महाद्वीप के रूप में अलग हो गया.

दक्षिणी प्रशांत महासागरों में दुनिया का आठवां महाद्वीप Zealandia स्थित है. भू वैज्ञानिकों ने इस महाद्वीप की खोज 2017 में ही कर ली गई थी, लेकिन इसका मानचित्रण ना होने की वजह से इसके क्षेत्रफल का अनुमान नहीं लगाया जा सकता था, लेकिन कुछ ही समय बाद, GSM Science की एक टीम ने पुष्टि की, और बताया कि उन्होंने दुनिया में मौजूद आठवें महाद्वीप की खोज कर लिया है.

दुनिया का आठवां महाद्वीप कहां स्थित है

महाद्वीप क्या होता है? शायद आप सभी इस प्रश्न का जवाब जानते हो, जब समुद्र के स्थित एक छोटा सा स्थल भूभाग जो चारों ओर समुद्री जल से घिरा हो उसे द्वीप कहते हैं, लेकिन जब एक बड़ा सा स्थल भूभाग चारों ओर समुद्री जल से घिरा हो तो उसे हम महाद्वीप कहते हैं. पूरी धरती पर ऐसे सात महाद्वीप है, जिसमें एशिया महाद्वीप सबसे बड़ा महाद्वीप है, इस महाद्वीप को सभ्यता का पलना कहा जाता है, क्योंकि सबसे पहले सभ्य मानव यही आए थे, और यहीं से मानव जाति का विकास शुरू हुआ था.

eighth continent of world Zeelandia
eighth continent of world Zeelandia

लेकिन कुछ समय पहले जियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ अमेरिका जनरल ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि, धरती पर 8वा महाद्वीप भी है. जिसे जीलैंडिया के नाम से जाना जाता है. जूलॉजिकल सोसाइटी ने इस आठवें महाद्वीप के भूभाग का क्षेत्र का क्षेत्रफल लगभग 5000000 वर्ग किलोमीटर बताया है. यानी इस 21 महाद्वीप की तुलना ऑस्ट्रेलिया के दो-तिहाई हिस्से के बराबर की जा सकते हैं.

आठवां महाद्वीप किसका हिस्सा है

जीलैंडिया नाम का महाद्वीप Oceania नामक महाद्वीप का हिस्सा है, वैज्ञानिकों का यह मानना है कि वह Oceania द्वीप का 6% हिस्सा पानी के ऊपर है बाकी का 94% हिस्सा समुद्र में डूबा हुआ है, इस 6% हिस्से पर दो देश न्यूजीलैंड और न्यू केलेडोनिया नाम का देश स्थित है, वैज्ञानिकों का कहना है कि, इस जीलैंडिया के डूबे हुए हिस्से में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक ऊर्जा संसाधन जैसे पेट्रोलियम पदार्थ गैस इत्यादि मौजूद है.

Lost 8th continent of the world

द इंडिपेंडेंट अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार जीलैंडिया नाम के इस महाद्वीप का एक अलग ही अपना बहुत शास्त्र हैं इस आठवे नए महाद्वीप का तल समुद्री तल की तुलना में कहीं ज्यादा मोटा और कठोर है, न्यू जीलैंड की GNS साइंस संस्था ने बताया कि, यह नया महाद्वीप न्यूजीलैंड का उत्तरी और दक्षिणी द्वीप और न्यू कैलिडोनिया का उत्तरी भागों से मिलकर बना है.

2017 से ही न्यूजीलैंड के भू-शास्त्र वैज्ञानिकों ने इसका टेक्टोनिक और बैथीमेट्रिक नक्शे का प्रारूप तैयार कर लिया था. निक मोरटाइमर नाम के एक भू शास्त्र वैज्ञानिक के अनुसार इस आठवें महाद्वीप का कॉन्सेप्ट 1995 में आया था। लेकिन इसके मानचित्रण और सही स्थिति का पता लगाने में 22 साल का समय लग गया. लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे आठवें महाद्वीप की मान्यता दी है

8वें महाद्वीप जीलैंडिया की विशेषता

वैज्ञानिको इसके सर्वेक्षण में यह पाया कि इस नए महाद्वीप का 94% हिस्सा समुद्री जल में डूबा हुआ है और 6% हिस्सा दिखाई देता है यह प्रशांत महासागर में 38 फीट की गहराई में है, वैज्ञानिकों का मानना है कि इस द्वीप की जमीने काफी ऊंची नीची है, इसमें ऊंचे पहाड़ और गहरी घाटियां मौजूद है. यदि इस दूध की तुलना भारत के क्षेत्रफल से की जाए तो यह करीब 17 लाख वर्ग किलोमीटर बड़ा है, भले ही या महाद्वीप आज जल में डूबा हुआ है.

eighth continent of world Zeelandia
eighth continent of world Zeelandia

लेकिन, इसकी संरचना की शुरुआत जीलैंडिया सुपरकॉन्टीनेंट गोंडवाना लैंड से टूट कर 7.90 करोड़ साल पहले ही हो चुका था, लेकिन, यह 2.30 करोड़ वर्ष पहले समुद्र में डूब गया था. सेटेलाइट से जीलैंडिया का भूभाग देखना मुश्किल है लेकिन लॉर्ड होवे आइलैंड के पास बॉल्स पिरामिड नाम के एक चट्टान समुंद्र से बाहर निकली हुई है जिसे यह पता चलता है कि इसके नीचे एक बहुत ही बड़ा महाद्वीप स्थित है.

प्रशांत महासागर में मौजूद है, दुनिया का आठवां महाद्वीप ‘जीलैंडिया’

आने वाले समय में, दुनिया को आठवां महाद्वीप Zealandia continent के बारे में भी पढ़ने को मिलेगा, यदि इस महाद्वीप का डूबा हुआ हिसाब भरकर ऊपर आता है तो सबसे अधिक फायदा इसके आसपास स्थित देश जैसे न्यूजीलैंड को होगा, हो सकता है आने वाले समय में न्यूजीलैंड का भूभाग और भी विस्तृत हो जाए और इसके पास अन्य देशों की तुलना में और भी ज्यादा खनिज संसाधन और पेट्रोलियम पदार्थ हो.

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