युग का समय सिद्धांत- Time Theory of Yuga Cycle

हिन्दू काल गणना यानि मध्ययुग, आधुनिक युग, वर्तमान युग, कलयुग सतयुग द्वापर युग, त्रेतायुग के बारे में हम बचपन से ही सुनते आ रहे है| ग्रथो की समझ रखने वाले लोग चार युगों अर्थात युग वर्णन (Time Theory of Yuga) वाले सिद्धांत को सच मानते है और उन्हें फॉलो भी करते है|

इसके विपरीत कुछ लोग इन्हें myth मानकर इसे अवैज्ञानिक कारण मानते है परन्तु वो कहते है की –

एकः शत्रु र्न द्वितीयोऽस्ति शत्रुः ।
अज्ञानतुल्यः पुरुषस्य राजन् ॥

अर्थात- इन्सान का एक ही शत्रु है, वह है अज्ञान ।

अज्ञानता के कारण कुछ लोगो युग के हिन्दू काल गणना को अवैज्ञानिक कारण मनाकर टाल देते है| आज की यह post हिन्दू सोच रखने वालो को समर्पित है| इस post में हम आपको Time Theory of Yuga Cycle और Hindu Age Calculation के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करेगे

 

युग का समय सिद्धांत- Time Theory of Yuga Cycle

हिन्दू काल गणना (Time Theory of Yuga Cycle)

  • क्रति = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग
  • 1 त्रुति = सैकन्ड का 300 वाँ भाग
  • 2 त्रुति = 1 लव ,
  • 1 लव = 1 क्षण
  • 30 क्षण = 1 विपल ,
  • 60 विपल = 1 पल
  • 60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट ) ,
  • 2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा )
  • 24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार) ,
  • 7 दिवस = 1 सप्ताह
  • 4 सप्ताह = 1 माह ,
  • 2 माह = 1 ऋतू
  • 6 ऋतू = 1 वर्ष ,
  • 100 वर्ष = 1 शताब्दी
  • 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी ,
  • 432 सहस्राब्दी = 1 युग
  • 2 युग = 1 द्वापर युग ,
  • 3 युग = 1 त्रैता युग ,
  • 4 युग = सतयुग
  • सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग
  • 76 महायुग = मनवन्तर ,
  • 1000 महायुग = 1 कल्प
  • 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ )
  • 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म )
  • महाकाल = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म )

 

युग के प्रकार और समय अवधि (Epoch Type and Time Period)

हिन्दू पुरानो और  प्राचीनतम वैदिक ग्रंथों के अनुसार युग के प्रकार और समय अवधि को चार भागो में बाटा गया है| और इन चारो युगों को सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर, कलियुग के नाम से जाना जाता है| यहाँ युग वर्णन हिंदी में (what is the time period of all the four yugas?) किया गया है

सत युग का समय काल 1,728,000 सौर वर्ष का होता है 
त्रेता युग का समय काल 1,296,000 सौर वर्ष का होता है 
द्वापर युग का समय काल 864,000 सौर वर्ष का होता है 
कलि युग का समय काल 432,000 सौर वर्ष का होता है

1.सतयुग की परिभाषा (Definition of Satyuga)

प्राचीनतम वैदिक ग्रंथों के अनुसार सतयुग का समय काल 1,728,000 सौर वर्ष का होता है|
इस युग में मनुष्य की आयु 100000 वर्ष होती है| यानी एक मनुष्य 100000 वर्ष तक जीवित रहता है| और मनुष्य की लंबाई 32 फिट बताई जाती है| इस समय काल में पाप, कुकर्म, छल, कपट की मात्रा शून्य होती है और पुण्य की मात्रा 100% होती है। सतयुग अवतार – मत्स्य, कूर्म, वाराह, नृसिंह ( सभी अमानवीय अवतार हुए )

2.त्रेतायुग की परिभाषा (Definition of Tretayug)

प्राचीनतम वैदिक ग्रंथों के अनुसार त्रेता युग का समय काल 1,296,000 सौर वर्ष का होता है  त्रेतायुग में मनुष्य की लंबाई 21 फिट होती है| त्रेता युग में मनुष्य की आयु 10,000 वर्ष होती है| इस युग में पाप की मात्रा 25% होती है और पुण्य की मात्रा 75% होती है। त्रेतायुग के अवतार – वामन, परशुराम, राम (राजा दशरथ के घर)

3.द्वापर युग की परिभाषा (Definition of Dwapara Yuga)

प्राचीनतम वैदिक ग्रंथों के अनुसार द्वापर युग का समय काल 864,000 सौर वर्ष का होता है| द्वापरयुग में मनुष्य की लंबाई 11 फिट यानी 7 हाथ बतायी गई है। इस युग में पाप की मात्रा 50% होती है जबकि पुण्य की मात्रा 50% होती है। द्वापर युग में मनुष्य की आयु 1000 वर्ष होती है और इस युग से ही कलयुग की शुरुआत होती है|  द्वापर युग के अवतार – कृष्ण, (देवकी के गर्भ से जन्मे और नंद के घर पालन-पोषण हुआ)

4.कलियुग की परिभाषा (Definition of Kali Yuga)

प्राचीनतम वैदिक ग्रंथों के अनुसार कलियुग का समय काल 432,000 सौर वर्ष का होता है कलियुग में मनुष्य की लंबाई 5 फिट 5 इंच यानी साढ़े तीन हाथ बतायी गई है। इस युग में धर्म का सिर्फ एक चैथाई अंश ही रह जाता है। इस युग में पाप की मात्रा 75% होती है, जबकि पुण्य की मात्रा 25% होती है।  कलियुग में मनुष्य की आयु 100 वर्ष होती है|  द्वापर युग के अवतार कल्कि (ब्राह्मण विष्णु यश के घर)

 

1 युग कितने साल का होता है?

युग के बारे में कहा जाता है कि 1 युग लाखों वर्ष का होता है, जैसा कि सतयुग लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष, त्रेतायुग 12 लाख 96 हजार वर्ष, द्वापर युग 8 लाख 64 हजार वर्ष और कलियुग 4 लाख 32 हजार वर्ष का बताया गया है।

चारों युगों का समय अलग-अलग है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार समय का विभाजन त्रुटि वेध, लव, निमेष, काष्ठा मुहूर्त, पहर, दिन, पक्ष, मास, अयन, वर्ष आदि का आकलन करने के बाद युगों का विभाजन निम्नलिखित रूप से किया है।

भागवत पुराण में कलियुग 1200, द्वापर 2400, त्रेता 3600, और सतयुग 4800 वर्षों का लिखा है वह दिव्य वर्ष हैं। एक दिव्य वर्ष मनुष्यों के 360 वर्ष के बराबर होता है। जैसे

 

कलियुग का अंत कब होगा (When will the end of Kali Yuga)

कलियुग का समय काल की आयु  432,000 सौर वर्ष आंकी गई है| यदि सरल शब्दों में कहे तो सृष्टि की कुल आयु चार अरब बत्तीस करोड़ वर्ष आंकी गई है।
जिसमें से एक अरब छियानवे करोड़ आठ लाख तरेपन हजार एक सौ बीस वर्ष बीत चुके हैं। अब 28 वहां कलियुग चल रहा है। कुल 71कलियुग होते हैं। 28 वें कलियुग का 5121 वां बर्ष ‌चल रहा है।

 

युग वर्णन से सम्बंधित FAQ Related to four yugas? 

Q. एक सदी में कितने साल होते हैं?
एक सदी में 100 वर्ष होते है| सदी को शताब्दी के नाम से भी जाना जाता है| शताब्दी शब्द लैटिन के ‘सेंटम’ से निकला है, जिसका अर्थ ‘एक सौ’ होता है।

 

Q. एक साल में कितने सप्ताह होते हैं?
1 साल में 52 सप्ताह होता है।

 

Q. 1 दशक में कितना साल होता है?
एक दशक में दस वर्ष होते हैं।

 

हिन्दू काल गणना (Time Theory of Yuga Cycle)  के इस लेख में हमने आपको युग वर्णन (Time Theory of Yuga), चारो युगों को सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर, कलियुग के साथ कलियुग का अंत भी बताए हमें उम्मीद है कि  इस लेख की सूचना आपके लिए ज्ञानवर्धक साबित होगी।

“युग का समय सिद्धांत” इस लेख को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद, हमें उम्मीद है, की आपको यह हिंदी लेख जरूर पसंद आया होगा|

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नोट:इस लेख में दी गई जानकारी इन्टरनेट पर उपलब्ध विभिन्न श्रोतो से ली गई है| यह लेख किसी भी प्रकार की धार्मिक भावना की अवहेलना नहीं करता है और ना ही यह वेबसाईट इसकी ज़िम्मेदारी लेता है|

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