जीएसटी क्या है, जीएसटी के प्रकार और फायदे | GST in Hindi

GST in Hindi :टैक्स, अंग्रेजों के समय से चली आ रही एक व्यवस्था प्रणाली है, इतिहास के पिछले समय में ब्रिटिश सरकार भारतीय किसानों मजदूरों से कई रूप में टैक्स वसूली करते थे, कुछ समय बाद भारत आजाद हुआ, आजाद होते ही अंग्रेजों का शासन खत्म हो गया लेकिन उनके द्वारा बनाई गई टैक्स वसूलने की प्रणाली भारत में आज भी चली आ रही है. टैक्स की वसूली सरकार और देश के लिए काफी महत्वपूर्ण महत्व रखती है.

भले ही आज के समय में टैक्स की प्रणाली और टैक्स कलेक्ट करने की पद्धति बदल गई हो लेकिन आज भैया वर्तमान समय में भी टैक्स नियमों में कई प्रकार के सुधार और संशोधन करके इसे चलाया जा रहा है,

चलिए टैक्स का मतलब समझते हैं, जब भी हम भारत में निर्मित देश में किसी वस्तु सेवा का उपयोग करते हैं तो हमें उसके बदले सरकार को डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रूप में टैक्स देना पड़ता है, हालांकि टैक्स कई प्रकार के हो सकते हैं ,और जीएसटी भी एक प्रकार की टैक्स है, भारत के केंद्रीय सरकार में Excise Duty, VAT, Entry Tax, Service Tax जैसे कई अलग-अलग टैक्स को हटाकर जीएसटी टैक्स (GST Tax In hindi) को भारत में क्रियान्वित किया है.

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जीएसटी का फुल फॉर्म क्या होता है

जीएसटी का फुल फॉर्म “Goods And Services Tax” होता है, जीएसटी को हिंदी में “माल एवं सेवा कर” के नाम से जाना जाता है, यह केंद्रीय सरकार द्वारा Excise Duty, VAT, Entry Tax, Service Tax जैसे-जैसे 17 प्रकार के इनडायरेक्ट टैक्स के बदले लगाए जाने वाला जीएसटी टैक्स है. विश्व में जीएसटी लागू करने वाला सबसे पहला देश फ्रांस था, जिसने, टैक्स की चोरी को रोकने के लिए 1954 में जीएसटी को लागू किया, और इस तरह फ्रांस जीएसटी लागू करने वाला विश्व का पहला देश बना. भारत कनाडा देश की gst tax model की रूपरेखा पर काम करता है.

लेकिन भारत में 1 जुलाई 2017 को पहली बार केलकर समिति की सिफारिश पर जीएसटी लागू किया गया, भारत में जीएसटी विधेयक बिल को सबसे पहले 12 अगस्त 2016 में असम राज्य में पारित किया गया था. और भारत में जीएसटी बिल को पारित करने वाला सबसे अंतिम राज्य जम्मू कश्मीर था. और इस प्रकार 01 जुलाई 2017 को संसद में वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम पारित होने के बाद पूरे भारत में जीएसटी लागू हुआ। भारत में GST को पास कराने वाला 122वा विधेयक बिल था. और इस जीएसटी बिल को 101वा संविधान संशोधन के द्वारा पास किया गया.

जीएसटी क्या होता है पूरी जानकारी हिंदी में

जीएसटी “एक देश एक टैक्स” के रूप में जाना जाता है, टैक्स, किसी भी देश की सरकार का अपने देश की जनता से आधिकारिक तौर पर लिया जाता है. क्योंकि सरकार के पास आमदनी का सबसे मुख्य स्रोत टैक्स ही होता है. अब किसी भी देश की जनता से दो प्रकार से टैक्स लिया जाता है. पहला Direct Tax और दूसरा Indirect Tax.

Direct Tax को सीधे कर के रूप में किसी व्यक्ति या किसी कंपनी से सीधे तौर पर ले लिया जाता है, लेकिन indirect tax किसी चीज की खरीद बिक्री पर लगता है. और मुख्य रूप से सरकार इन्हीं दो तरीकों से टैक्स का collection करती है. सरकार को डायरेक्ट टैक्स वसूलने में ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता था.

लेकिन इनडायरेक्ट टैक्स कई प्रकार के होते थे जैसे- Custom Duty Tax, Excise Duty Tax, Service Tax, Sales Tax, VAT और इसी तरह 17 प्रकार के टैक्स थे, जो इनडायरेक्ट टैक्स में शामिल थे, इसे कलेक्ट करने और इसके लेखा-जोखा करने में सरकार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन जीएसटी बिल को पारित करके इन सभी इनडायरेक्ट टैक्स को जीएसटी बना दिया गया. जिसे आज “Goods And Services Tax“ यानी जीएसटी के नाम से जाना जाता है.

चुकी, कई सारे इनडायरेक्ट टैक्स को मिलाकर जीएसटी बनाया गया. इसलिए जीएसटी भी एक प्रकार का इनडायरेक्ट टैक्स ही है. जीएसटी बिल को पारित करते समय डायरेक्ट टैक्स से कोई भी छेड़-छाड़ नहीं किया गया है. आज भी भारतीय नागरिक को जीएसटी टैक्स जैसे Income Tax, Corporation Tax, Property Tax, Gift Tax, Health Tax इत्यादि देना पड़ता है. इसलिए gst tax, direct tax से अलग है.

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जीएसटी टैक्स किसके ऊपर लगता है

अब आप सोच रहे होंगे, कि वह कौन से व्यक्ति कंपनियां लोग हैं जिसे जीएसटी टैक्स देना होगा, यह टेक्स केवल 3 लोगों को ही देना होता है,

  • जिनका साल भर का turnover (लेन देन) ₹2000000 का हो

मान लीजिए कि कोई दुकानदार अमेज़न पर सामान बेचने के लिए 20 लाख रुपए का माल मंगाता है, इस 20 लाख के माल को बेचने के बाद उसे 21 लाख का Profit होता है. अब इस पूरे लेनदेन में आपने 20 लाख का टर्नओवर यानी लेनदेन किया अब अब GST Category में आ चुके हैं और अब आपको GST Tax pay करना होगा. कुछ स्पेशल केस में पहाड़ी एरिया वाले क्षेत्र में इस लेनदेन की सीमा 20 लाख से घटाकर 10 लाख तक की ही है.

  • एक राज्य से दूसरे राज्य में खरीद बिक्री करने पर

अगर आप एक राज्य से दूसरे राज्य में किसी भी समान वस्तु या सेवा का लेनदेन कर रहे हैं तो आप जीएसटी टैक्स भुगतान के कैटेगरी में आ जाते हैं और आपको सरकार को जीएसटी टैक्स देना होता है. किस कैटेगरी के अंदर आप यदि एक राज्य से दूसरे राज्य में ₹1 का भी व्यापार है लेन-देन करते हैं तो आपको यह टैक्स देना होता है.

  • ऑनलाइन इकॉमर्स बिजनेस के करीब बिक्री पर जीएसटी टैक्स

यदि आप ऐमेज़ॉन फ्लिपकार्ट मिंत्रा या किसी भी ऑनलाइन बिजनेस में ऑनलाइन खरीद बिक्री करते हैं तो उस पर जीएसटी टैक्स लागू होता है. इसलिए ₹50 के भी ऑनलाइन पिज़्ज़ा ऑर्डर करने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग पर जीएसटी टैक्स जोड़ लिया जाता है. और इस प्रकार इनडायरेक्ट रूप से यह जीएसटी टैक्स सरकार को चला जाता है

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जीएसटी टैक्स कितने प्रकार के होते हैं,

जीएसटी टैक्स चार प्रकार के होते हैं, इन चारों जीएसटी के अपने अलग-अलग नियम और टैक्स भुगतान के अलग-अलग नियम है चलिए जीएसटी टैक्स के प्रकार और नियमों को जानते हैं,

  • Central Goods and Service Tax (CGST)

CGST टैक्स हर हाल में सेंट्रल गवर्नमेंट को देना होता है, यदि कोई व्यापारी अपने ही राज्य क्षेत्र में किसी अन्य व्यापारी से लेन देन कर रहा है, तब भी सीजीएसटी टैक्स केंद्र सरकार को चुकाना होता है.

  • State Goods and Service Tax (SGST)

SGST टैक्स state government को जाती है. अब यदि मानने की कोई एक बिजनेसमैन अपने ही राज्य के अंदर किसी कारोबार में लेन-देन करता है तो अनिवार्य रूप से उसे CGST और GST टैक्स देना पड़ेगा.

  • Union Territory Goods and Service Tax (UTGST/UGST)

UTGST/UGST टैक्स केवल केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू कश्मीर, चंडीगढ़, अंडमान निकोबार दीप समूह) और राज्यों के अंदर होने वाले व्यापारिक लेन-देन के बदले लगाया जाता है.

  • Integrated Goods and Service Tax (IGST)

जब कोई लेन देन किसी दूसरे राज्य में होता है तो उस स्थिति में केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों के हिस्से का टैक्स एक में ही जुड़ जाता है, जिसे IGST (Integrated Goods and Service Tax) के नाम से जाना जाता है. भारत में IGST की चर्चा संविधान के अनुच्छेद 269-A में किया गया है.

IGST = CGST + SGST

मान लिया जाए कि, कोई प्रोडक्ट राजस्थान से बनकर उत्तर प्रदेश में बिकने को आई. अब इस स्थिति में तीन चीजे है, एक राजस्थान सरकार दूसरा उत्तरप्रदेश सरकार, और तीसरा केन्द्रीय सरकार. अब सबसे पहले Integrated Goods and Service Tax (IGST) का पूरा हिस्सा central government के पास चला जाएगा. केंद्र सरकार अपना 50% हिस्सा रखकर, बाकी का 50% उस राज्य को दे देगा, जिसके पास प्रोडक्ट बिकने के लिए गया है यांनी यहाँ उस 50% हिस्से का हकदार उत्तर प्रदेश राज्य सरकार होगा. यानी दो राज्यों के बीच में होने वाले लेनदेन में IGST में SGST का हिस्सा उस राज्य को जाता है, जहाँ प्रोडक्ट बेचा गया है, इसलिए IGST को Destination GST भी करते हैं.

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GST RETURN क्या होता है

जब हम किसी प्रोडक्ट का लेनदेन करते हैं तो उससे प्राप्त हुआ जीएसटी टैक्स हमारे पास ही होता है. ऐसा नहीं है कि हम हर दिन हुए लेनदेन से प्राप्त जीएसटी टैक्स को हर दिन सरकार को देते रहें. इस परेशानी से बचने के लिए सरकार ने एक नियम बनाया है जिसे GST Return के नाम से जाना जाता है इस Gst Return में महीने भर में प्रोडक्ट के लेनदेन से प्राप्त हुए, टैक्स सरकार के पास जमा करना होता है.

यदि आसान भाषा में Gst Return का मतलब समझे तो, GST के रूप में जो टैक्स होता है, वह businessman के पास ही होता है क्योंकि ग्राहक जो प्रोडक्ट या सेवा प्राप्त करता है और उसके बदले जो बिल का भुगतान करता है उसमें एक हिस्सा जीएसटी टैक्स भी होता है. और ऐसे ही केंद्रीय सरकार को रिटर्न करना पड़ता है इसे GST Return कहते हैं. इसे GST-R के नाम से भी जाना जाता है

GST Return महीने में तीन बार किया जा सकता है, इसका मतलब कोई भी व्यापारी अपना GST Return हर 10 दिन के अंतराल पर भर सकता है. GST Return को और भी सुविधाजनक बनाने के लिए गवर्नमेंट के द्वारा कई सारे कई सारे स्टेप्स को बनाए गए हैं जैसे

  • GSTR1 : इसमें किसी भी बिजनेस में हुए लेनदेन को महीने भर की बिक्री का स्टेटमेंट आने वाले अगले महीने की 11 तारीख तक GST Return फाइल करना होता है, लेकिन वैसे व्यापारी जिनकी सालाना बिक्री 1.5 करोड़ रुपए से कम है उन्हें यह रिटर्न हर महीने नहीं भरना होता है, उन्हें हर तिमाही पर यह रिटर्न फाइल करना होता है
  • GSTR2: वर्तमान समय में इस जीएसटी टाइप को स्थगित कर दिया गया है, इसके अंतर्गत किसी भी व्यवसाय को उसके द्वारा हर महीने की गई खरीदारी यानी (Inward Supply) का statement देने के लिए इस GST Return का यूज किया जाता था।
  • GSTR3: वर्तमान में इसे स्थगित करके रखा गया है, इस GST Return टाइप में महीने भर में हुए अभी लेनदेन यानी खरीदारी और बिक्री का विवरण के साथ चुकाए गए टैक्स का स्टेटमेंट देना होता था.
  • GSTR3B: जीएसटी लागू होने के क्रम में GSTR3B को लागू नहीं किया गया था, इसके लिए केंद्रीय सरकार एक छोटा सा फॉर्म प्रोवाइड करते थे, जिसमें रिटर्न में महीने में होने वाली खरीद और बिक्री का विवरण और छुपाए बैठे इसकी जानकारी संक्षेप में देना होता था, लेकिन इस प्रक्रिया को अभी बंद कर दिया गया

जीएसटी की गणना कैसे की जाती हैं, Inbound और Outbound Gst क्या है?

जीएसटी बिल के लागू होते हैं जीएसटी से जुड़े कई सारे ऐसे टर्मिनोलॉजी का इस्तेमाल किया जाने लगा, जो साधारण व्यवसाय करने वाले और आम लोगों को समझ में नहीं आता है. अब इसमें कई सारे व्यापार करने वाले लोगों को यह समझ में नहीं आता है कि जीएसटी की गणना कैसे की जाती है और इससे जुड़े इनबॉउंड और आउट बाउंड जीएसटी क्या होता है. जीएसटी की गणना इनबॉउंड एंड आउटीबाउंड की प्रक्रिया के माध्यम से ही की जाती है.

अब हम Inbound और outbound GST क्या है? इसे एक उदाहरण से समझते हैं. Inbound और outbound GST को समझने के लिए हम Wholesale, Retailer and Customer को लेते हैं.

जब कोई रिटेलर किसी होलसेलर से कोई वस्तु या सेवा किसी कस्टमर को बेचने के लिए खरीदता है, तो उस समय रिटेलर के द्वारा दिया जाने वाला टैक्स Inbound टैक्स कहलाता है. वही जब रिटेलर किसी कस्टमर वही वस्तु या सेवा बेचता है, तो उस पर कस्टमर के द्वारा रिटेलर को दिया जाने वाला टैक्स outbound जीएसटी टैक्स कहलाता है. लेकिन इस प्रक्रिया में दो बार जीएसटी टैक्स का भुगतान होने के बाद भी केंद्रीय और राज्य सरकार को एक निश्चित टैक्स ही जाता है.

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जीएसटी किस दर से लिया जाता है

जीएसटी टैक्स को सरकार के द्वारा देश के हित के लिए और बहुत ही सोच समझ कर लागू किया गया है. जीवन के लिए उपयोगी और अति महत्वपूर्ण वस्तु और प्रोडक्ट के लिए कम टैक्स और भोग विलास के चीजों पर थोड़ा ज्यादा और Education और Health जैसी सेवाओं को इस टैक्स पर बाहर रखा गया है. जीएसटी टैक्स लगाकर इस टैक्स प्रणाली को बहुत ही न्याय पूर्ण बनाया गया है. इसके लिए अलग-अलग वस्तुओं पर अलग-अलग जीएसटी दर लगाया जाता है, मतलब हर प्रोडक्ट और हर प्रकार की सेवा पर आपको एक जैसा जीएसटी टैक्स नहीं देना होता है कहीं आप को जीएसटी में पूरी तरह छूट मिल जाती है तो कहीं कम जीएसटी देना होता है. GST Council के द्वारा जीएसटी टैक्स की दर को लगाने के लिए कुल पांच slab बनाए गए हैं. जीएसटी दर की इन 5 स्लैब में 500+ सेवाएं और 1300+ प्रोडक्ट को शामिल किया गया है जो कुछ इस प्रकार है.

  • 00% GST RATE : जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं पर 0% जीएसटी लगता है, इसमें दूध, हरी सब्जियां, अनाज, और agriculture product, Bank charges on savings account, Natural honey, Salt को शामिल हैं
  • 05% GST RATE : जीवन के लिए सामान्य आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं पर, जैसे मसाले, तेल, ब्रेड, कॉफी, बेबी फूड, न्यूज़ पेपर प्रिंटिंग, टेलरिंग, कोयला, बायोगैस के अलावे hand-made items को भी शामिल किया गया है.
  • 12% GST RATE : रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं पर, जैसे कि Processed food, Dairy products, Dry fruits and nuts, Cooking utensils, Business class flight tickets को शामिल किया गया है
  • 18% GST RATE :  मध्यम स्तर का जीवन जीने वाले लोगों के इस्तेमाल में आने वाली वस्तुएं जैसे कि Electrical and electronic appliances, Mineral water, Pasta, Biscuits, Aluminium foil, Optical fibre, Winding wires, Hair oil, Shampoo, Toothpaste, Perfume, Movie tickets, Hotel accommodation, Telecom and IT services जैसी प्रोडक्ट और सेवाओं को शामिल किया गया है.
  • 28% GST RATE : विलासी और हानिकारक श्रेणी में आने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं पर, जैसे कैफीनयुक्त पेय पदार्थ, तंबाकू और तंबाकू उत्पाद, पान मसाला और गुटखा, ईंधन, रेसिंग क्लब सेवाएं, थीम पार्क, मनोरंजन पार्क और जॉय राइड्स जैसी सेवाओं और वस्तुओं को शामिल किया गया है.

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GSTIN क्या होता है, इसका क्या उपयोग है

GSTIN का फुल फॉर्म “Goods and Services Tax Identification Number” होता है. जब भी हम जीएसटी टैक्स पोर्टल पर जीएसटी के लिए रजिस्ट्रेशन करते हैं तब हमें एक 15 डिजिट का नंबर दिया जाता है. इस 15 डिजिट के नंबर में शुरुआत के 2 अंक स्टेट कोड को बताता है, इसके बाद का 10 डिजिट रजिस्टर यूजर का पैन कार्ड नंबर होता है. और अंत का 3 डिजिट जीएसटी पोर्टल के द्वारा जनरेट किया यूनिक कोड होता है.

इस GSTIN नंबर को GSTn (Goods and Services Tax Network) के द्वारा provide किया जाता है. किसी जीएसटी पोर्टल पर रजिस्टर करके आप जीएसटी टैक्स भरने के लिए खुद को रजिस्टर करते हैं. यह GSTn Portal आपके द्वारा भुगतान किए गए जीएसटी टैक्स का लेखा जोखा रखता है.

जीएसटी से संबंधित किसी भी प्रकार के विवाद या जीएसटी के नियमों में परिवर्तन के लिए जीएसटी काउंसिल का गठन किया गया है. इस काउंसिल की चर्चा संविधान के अनुच्छेद 279-A में की गई है. इस Goods and Services Tax council में कुल 33 सदस्य हैं. इस काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में वित्त मंत्री होते हैं.

अध्यक्ष के सहायक के रूप में एक राज्य वित्त मंत्री होते हैं, इसके बाद 28 राज्यों के सभी एक-एक वित्त मंत्री भी के सदस्य होते हैं, इसके अलावा वह ऐसे union territory जिसमें विधानसभा का चुनाव होता है, जैसे जम्मू कश्मीर, दिल्ली और पुडुचेरी इन तीनों union territory के वित्त मंत्री भी इस काउंसिल के सदस्य होते हैं.

जीएसटी के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे करें

भारत सरकार के टैक्स डिपार्टमेंट के द्वारा वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) को बहुत ही आसान सुरक्षित और परेशानी मुक्त बना दिया गया है, छोटे से छोटे व्यापारी भी आसानी से जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कर सकता है और अपना Gst-in Number ले सकता है. आइए जीएसटी रजिस्ट्रेशन के ऑनलाइन प्रक्रिया को step by step समझते हैं

  • सबसे पहले जीएसटी क्या ऑनलाइन पोर्टल पर लॉगिन करें
  • यहां फॉर्म सेलेक्ट करें, और अब आप अपना Email Id, Phone Number, Pan Card Number डालें
  • अब आपके ईमेल आईडी या फोन नंबर पर एक ओटीपी पिन आएगा जिसे आप को वेरीफाई करना है
  • ओटीपी पिन वेरीफाई करते हैं आपको एक Application Reference Number दिया जाएगा.
  • इस Application Reference Number का उपयोग करके आप जीएसटी रजिस्ट्रेशन फॉर्म के भाग- बी को भी भरे
  • इसके बाद अपने व्यवसाय के प्रकार के अनुसार आवश्यक दस्तावेज को अपलोड करें.
  • अब आपका जीएसटी रजिस्ट्रेशन सफलतापूर्वक हो चुका है, अब जीएसटी अधिकारी आपके आवेदन की पुष्टि करेगा.
  • लगभग 3 या 4 दिनों के बाद जीएसटी अधिकारी या तो आपके एप्लीकेशन को अप्रूव कर देता है, और अब आप अपना जीएसटी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं. या फिर आपके व्यवसाय से जुड़े और अधिक विवरण में जानकारी के लिए GST-REG-03 भरने को कहता है
  • GST-REG-03 भरने के 7 दिनों के अंदर GST-REG-04 फॉर्म भी भरना होता है जरूरत पड़ने पर इसके साथ भी कुछ आवश्यक डॉक्यूमेंट अपलोड करने होते हैं.
  • अब दोबारा इसके बाद जीएसटी अधिकारी या तो आपके जीएसटी रजिस्ट्रेशन को अप्रूव कर देता है या फिर रिजेक्ट कर देता है
  • यहां जीएसटी अधिकारी के द्वारा यदि आपका जीएसटी रजिस्ट्रेशन खारिज कर दिया जाता है तो GST-REG-05 फॉर्म के जरिए आपको यह बता दिया जाता है कि आपका जीएसटी रजिस्ट्रेशन क्यों खारिज किया गया है.
  • GST-REG-05 फॉर्म मे दिए गए कारण को समझना होगा और फिर दोबारा जीएसटी रजिस्ट्रेशन करना होगा.
  • बहुत कम ही मामले में जीएसटी रजिस्ट्रेशन रिजेक्ट किया जाता है.

जीएसटी के क्या फायदे हैं

सरकार के द्वारा जीएसटी को बहुत ही सोच समझ कर देश के अंदर 17 अलग-अलग प्रकार के टैक्स को मिलाकर एक टैक्स के रूप में पारित किया गया, इस जीएसटी के लागू होने के बाद केंद्र सरकार ग्राहक विक्रेता जैसे सभी लोगों को हर स्तर पर लाभ हुआ है. चलिए विस्तार से जीएसटी के फायदे को समझते हैं,

  • जीएसटी के लागू होने से पहले सभी राज्यों में VAT मतलब वैल्यू ऐडेड टैक्स के साथ और भी कई प्रकार के टैक्स अलग-अलग लगाया जाता था. जिसके कारण एक ही प्रोडक्ट या सेवाओं का मूल्य अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो जाता था. अब जो कपड़े गुजरात में कम दामों में मिलते थे, उसी कपड़े का मूल्य उत्तर प्रदेश में ज्यादा हो जाता था. अब चुकी कपड़े गुजरात में सस्ते होते थे तो फैक्ट्रियां सबसे ज्यादा अपना इन्वेस्टमेंट गुजरात में ही करते थे और बाद में गुजरात से कपड़े बनाकर उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों को ऊंचे दामों में भेजते थे जिससे टैक्स और वस्तुओं सेवाओं का मूल्य असमान हो जाता था और विकास के स्तर पर भी कुछ राज्यों में ही विकास हो पाता था. लेकिन जीएसटी के आने से सभी राज्यों में प्रोडक्ट और सेवाओं के मूल्य पर लगने वाला टैक्स एक समान हो गया.
  • जीएसटी के लागू होने से पहले टैक्स का भुगतान करने वाले व्यवसाय को हर स्तर पर कई बार टैक्स देना होता था, जिसके कारण टैक्स चोरी की समस्या भी आती थी और सरकार को टैक्स कलेक्ट करने में भी परेशानियों का सामना करना होता था
  • वैसे व्यापारी और करदाता जो छोटे स्तर के हैं उन्हें टैक्स दर और टैक्स फाइलिंग में राहत मिली है. इन छोटे छोटे व्यापारियों और करदाताओं को 20-75 लाख टर्नओवर की स्कीम का लाभ लेने पर कम टैक्स देना होता है
  • राज्य के अंदर दो राज्यों के बीच में और Online e-commerce पर होने वाले लेनदेन में विवाद खत्म हो गए हैं. अब इसमें केवल एक ही टैक्स माने होता है.

GST क्या है पूरी जानकारी हिंदी में

जीएसटी लागू होने के पहले सरकार कई रूप में टैक्स लेती थी, लेकिन भारतीय सरकार के एक कदम में पूरी के पूरी टैक्स सिस्टम को इससे एक और सरकार को कई फायदे हैं दूसरी तरफ व्यापार में लेनदेन करने वाले व्यापारी और ग्राहक को भी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य में समानता देखने को मिलती है अब भारत के सभी राज्यों में लगभग सभी वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य लगभग बराबर की है

आपने इस पोस्ट में जीएसटी क्या है, जीएसटी के कितने प्रकार होते हैं, ऑनलाइन जीएसटी रजिस्ट्रेशन कैसे करें, इत्यादि के बारे में जाना यदि आप किसी भी तरह के बिजनेस कर रहे हैं तो आपको जीएसटी के बारे में सभी बातें पता चल चुकी होगी, यदि आपने इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ा हो तो, जीएसटी से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी इस पोस्ट में प्रदान की गई है. इस पोस्ट से संबंधित किसी भी प्रकार के सुझाव के लिए आप हमें कमेंट कर सकते हैं. यदि यह पोस्ट हेल्पफुल लगा तो इसे शेयर जरूर करें.

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